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21 अप्रैल 2002 को परम पूज्य आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में शिक्षा गौरव डॉक्टर विमल कुमार जैन प्रतिष्ठाचार्य जी के प्रतिष्ठाचार्यत्व में श्री सवाई लाल जी जैन कन्नौज के श्री हस्तो से श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर का शिलान्यास सहस्त्राधिक जनमेदिनी के मध्य जयकारों की गूंज के साथ हुआ था। 

27 अक्टुम्बर 2002 को ग्राम चोसला से पूर्व प्रतिष्ठित श्रीजी की तीन पाषाण प्रतिमाएं भगवान श्री आदिनाथ, भगवान श्री पार्श्वनाथ एवं भगवान श्री चन्द्रप्रभु जो लगभग 600 से 700 वर्ष पूर्व की अतिशयकारी हें को तलघर में विराजमान कर देव दर्शन हेतु स्थापित की गई। 

वर्ष 2005 में परम पूज्य क्षमा मूर्ति आचार्य 108 श्री विशद सागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में एवं प्रतिष्ठाचार्य पंडित विमल कुमार जी जैन बनेठा वालों के प्रतिष्ठाचार्यत्व में 23-04-2006 से 30-04-2006 के मध्य भव्य पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन हुवा जो आज भी सर्वत्र ख्याति प्राप्त व चिर स्मरणीय है मंदिर गर्भगृह और वेदी के आकार प्रकार के अनुरूप परम पूज्य आचार्य श्री की प्रेरणा व आशीर्वाद से यहां मूलनायक के रूप में भगवान आदिनाथ की 37 इंची प्रतिमा और आजू-बाजू में क्रमशः भगवान पद्म प्रभु एवं भगवान शांतिनाथ की 27 इंच की प्रतिमाओ की प्रतिष्ठा का आयोजन करते हुए विधि विधान पूर्वक सभी जिन बिंम्बो मे विराजमान किया गया मूलनायक आदिनाथ भगवान के साथ ही कमलासन पर चौसला ग्राम से लाये गये प्रतिष्ठित जिनबिम्बों को भी उल्लास पूर्वक विराजमान किया गया।

भूतल पर मूल वेदी में कुल 11 एवं पार्श्व वेदियों में तीन-तीन प्रतिमाएं विराजमान हें।

वर्ष 2016 में पूज्य मुनि 108 श्री पुलक सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में 31-01-2016 से 04-02-2017 के मध्य भव्य पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन हुवा जिसमें मन्दिर जी के प्रथम तल पर दोनोँ और वेदियों में क्रमशः तीन-तीन खड्गासन प्रतिमाएं एवं दो-दो रजत प्रतिमाएं विराजमान की गई।